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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

आवश्यकता है केवल एक ही आर्य हिन्दी पत्रिका की

आर्य समाज में अनेक संस्थाओ की ओर से विभिन्न हिन्दी पत्रिकाओं का प्रकाशन होता है. सदस्य भी कम होते हैं. और कई बार ये पत्रिकाएं कलह भी बढाती हैं.

इससे तो केवल एक ही हिन्दी पत्रिका निकले यही अच्छा है. इससे विचार भिन्नता भी कम होंगी. एकसूत्रता बनी रहेंगी. प्रभाव भी अधिक रहेगा. हर प्रकार से लाभप्रद रहेगा.

इस दिशा में कुछ करने की आवश्यकता है. दैनिक न हो तो कोई बात नहीं, साप्ताहिक भी पर्याप्त र‌हेगा.

‍‍भावेश मेरजा

नमस्ते

नमस्ते भावेष जी

सब समाजों को एक सूत्र में पिरोने के लिए भी एक महान प्रयास की आवश्यक्‍ता है | इंटरनैट का सहारा लेकर इस और कुछ प्रयास किया भी जाना चाहिए | अतः आपके उपरोक्‍त‌ उद्देष्य/ प्रस्ताव इस दिशा में भी एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं | पर प्रश्न‌ होगा कि इसे कैसे कार्यान्वित किया जाय ?