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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

पञ्च रत्न

पञ्च रत्न

पाँच कोषों से बना 'पञ्च रत्न', यह है वह अद्‍भुत रत्न जो हमें मिला है, जो प्रभु ने हमें दिया है | इसे साधारण न जानों | इसमें भोगने को एक नहीं पाँच खजाने हैं |

(1) अन्नमय कोश पहला खजाना है, इसमें खोजने को पाँच ज्ञान इन्द्रियाँ, भोगने को पाँच कर्म इन्द्रियों के खोल हैं, इसमें नौ द्वार हैं |

(2) दूसरा प्राणमय कोश है | पाँचों ज्ञान इन्द्रियों को पाँचों कर्म इन्द्रियों को चलाने वाला, पाँच प्राणों वाला | इस शरीर की कोई भी क्रिया प्राण के बिना सम्भव नहीं है |

(3) तीसरा मनोमय कोश है | पाँचों प्राणों को चलाने वाला मनोमय कोश | पाँच कर्मेन्द्रियाँ इससे सीधे सीधे सम्बन्धित है |

(4) चौथा है विज्ञानमय कोश | पाँचों ज्ञान इन्द्रियों से ज्ञान बटोरता हुआ विज्ञानमय कोश सारे शरीर का नियन्त्रण करता है | ज्ञान विज्ञान की पूरी खोज इसी में होती है |

(5) पाँचवां है आनन्दमय कोश | पाँचों कोशों को चलाने वाली आत्मा इसी में आनन्द पाती है |

इन पाँच कोशों को यदि हम एक साथ झँकृत कर दें तो क्या हो सकता है, क्या यह कभी हमने सोचा है ? अभी तो हम केवल एक कोश का ही आनन्द उठाते हैं, वह भी पूरा पूरा नहीं | बाकी कोश तो केवल एक नोकर की तरह कार्य करते नजर आते हैं |

अन्नमय कोश को अन्न से भरने में ही हमारा सारा जीवन व्यतीत होता जा रहा है | खाना पीना, पहनना टहलना, देखना भालना, भोग विलास इसी में बीत रहा है सारा जीवन | इसके पश्‍चात कुछ आता है तो मनोमय कोश, जहाँ ऊटपटांग भावों का हमने जमघट लगा रखा है, उन्हीं भावों में हम जीते हैं मरते हैं |उन्हें सुधारने का हम कभी ध्यान ही नहीं करते | मनोमय कोश और अन्नमय कोश की साँठ गाँठ में बाकी सभी कोश खाली से हो गये हैं | विज्ञानमय कोश का प्रयोग किया जाता है तो वह भी अन्नमय कोश की आवश्यक्ताओं को पूरा करने में, नहीं तो उसके प्रयोग की आवश्यक्ता हमें नजर नहीं आती है | आनन्दमय कोश यह क्या है , इसमें कौन है कौन नहीं है इसका तो हमें सपनों में भी ध्यान नहीं आता है |

तो अब बारी है पञ्च रत्न को पूरी तरह से समझने की, जानने की और उसे पूरी तरह प्रयोग करने की | एक एक खजाने को पूरी तरह प्रयोग करने की | क्यों छोड़ते हैं हम इस खजाने को बिना प्रयोग किये | जब यह नष्‍ट हो जाएगा, तब हमें पछताना पड़ेगा | तो इस खजाने के एक एक कोश को हम ध्यान पूर्वक प्रयोग करना सीखें, इनके प्रयोग की विधि जानें | इनमें से प्रत्येक को पूर्णरूपेण सशक्त करें और फिर पाएँ पूर्ण आनन्द |

इस पञ्च रत्न की एक मुख्य चाबी अथवा कुञ्जी के बारे में भी आपको बता दूँ | यह चाबी है 'ओउम् नाम' इसका इस खजाने को पूर्णरूपेण प्रयोग करने में महत्वपूर्ण हाथ है | इसके बिना इस खजाने का पूर्ण उप‌योग सम्भव ही नहीं है | अतः इसका प्रयोग करना अवश्य सीखें | यह वह कुञ्जी है जो सब कोशों को एक साथ खोल सकती है, बस इससे अपने खजाने को झंकृत करना सीख लें |