आइए अपने भारत का पुनरुद्धार करें ।

आइए अपने भारत का पुनरुद्धार करें ।

आज देश को आवश्यक्ता है -

1. शारीरिक बल की, ताकि हमें किसी का भय न रहे |

2. प्राणमयी शक्ति की, ताकि हम रोग रहित रहें |

3. मानसिक बल की, ताकि हम निर्भय होकर देश को आगे बढ़ा ले जाएँ |

4. बौद्धिक बल की, ताकि हमें दुनिया के आगे झुकना न पड़े |

5. आनन्दमय वातावरण की, कि जिसमें सब मिलजुल कर एक दूसरे का भला करते हुए रहें | हमारे पशु पक्षी तथा वनस्पति भी शान्त हों | हमारा सारा वातावरण उन्मुक्त हो | हर जगह स्वर्ग ही स्वर्ग हो |

इसके लिए भारत को सुधारने के लिए किये जाने वाले कार्यों की ब्रृह्त सूची तैयार करें | नीचे कुछ कार्यों की सूची दी है, इसे आगे बढ़ाएँ, इसमें लगातार आवश्यक्तानुसार सुधार करते जाएँ |

(क‌) आधार-भूत कार्य :-

1. 115 करोड़ जनता को आश्‍वासन दें कि अब उनके दिन फिरने वाले हैं |

2. यह भी आश्‍वासन दें कि अब बदमाशों का गला घुटने वाला है और भले लोगों का भला होने वाला है |

3. अब एक एक भले का काम सब रोज करने की शपथ लें |

भले के कामों की सूची : -

क. अपने आसपास की सफाई
ख. अपने आसपास कोई भूखा मिले, तो उसे भोजन दें
ग. अपने आसपास मुफ्त शुद्ध पानी पीने पिलाने की व्यवस्था को फिर से आरम्भ करें
घ. अपने आसपास किसी जानवर, पशु पक्षी को भी कष्‍ट न मिले यह ध्यान रक्खें, उन्हें भी भोजन पानी आदि प्रदान करें |
ङ. किसी का काम बिना रिश्‍वत, बिना लालच, बिना देरी किये, पूरी फुर्ती से करें
प‌. घर में वृद्धों की सेवा व सम्मान करें
फ‌. कुछ् न कुछ दाऩ‌-पुन अवश्य करें
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4. अपनी उन्नती के यह काम नित्य करने की शपथ लें : -

क. व्यायाम कम से कम 10 मिनट सुबह व 10 मिनट शाम प्रत्येक व्यक्ति करे
ख. प्राणायाम‌ कम से कम 10 मिनट सुबह व 10 मिनट शाम प्रत्येक व्यक्ति करे
ग. प्रभु का ध्यान कम से कम 10 मिनट सुबह व 10 मिनट शाम प्रत्येक व्यक्ति करे
घ. अपनी सफाई (तन व मन की) कम से कम 10 मिनट सुबह व 10 मिनट शाम प्रत्येक व्यक्ति करे
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5. अपने भोजन को पहले अधिक सात्विक बनाएँ

6. अपने सभी कार्य, अध्य्यन व सेवादि को पूरी पूरी तत्परता, कर्मठता व निष्‍ठा से करें

7. एक नोटबुक में अपनी उपरोक्त हेतु की गयी सभी क्रियाओं का हिसाब किताब रक्खें

8. अपनी कुछ गन्दी आदतों को नित्य छोड़ने का यत्न करें, यथा : -

क. टीवी अधिक देखना, सिनेमा देखना
ख. टीवी में गन्दे सीरीयल देखना
ग. टीवी में देश से दुर्भाव रखनेवालों के कार्यक्रम देखना
घ. टीवी में दिखाई जानेवाली अश्‍लीलता का बायकाट करें
ङ. बाजार के फास्‍टफूड खाना छोड़ने का प्रयत्न करें
प. बाजार में व्यर्थ की व अनावश्यक वस्तुएँ खरीदना
फ. समय को व्यर्थ नष्‍ट करना
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9, 10, ...............................................................................................................

(ख) अन्य कार्य जैसे देश रक्षा; अनुसन्धान; खेतीबाड़ी का विकास; बालकों का विकास‌; माताओं बहनों की सुरक्षा व विकास; बिमारियों से मुक्ति; गरीबी से मुक्ति; अज्ञान से मुक्ति; देश की प्राचीन विधाओं का पुनरुत्थान आदि आदि...........................................................................................

[आइए इस सूची को बढ़ाते व परिष्‍कृत करते जाएँ |]

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बंधुवर, आनं

बंधुवर,
आनंद जी ने एक अत्यन्त सराहनीय पहल की है.इस विषय की गम्भीरता को बिना कम किए मेरे चिंतन में कुछ प्रश्न उठता है.
जीवन में संकल्प तो अनेक लिए जाते हैं . जैसे हर नव वर्ष पर शिक्षित समाज में प्रचलन रहा है.पर हम अपने कितने संकल्प स्थिर और दृढ बना पाते हैं?
इतिहास में भीष्म प्रतिज्ञा और चाणक्य के संकल्प न केवल प्रसिद्ध हैं वरन् उन्होने समय की गति को एक नया मोड ही दे दिया था.महर्षि दयानंद का अपने गुरू को गुरू दक्षिणा मे दिया वचन भी इसी श्रेणी का सब निकट उदाहरण है.
आत्म शक्ति की एक संकल्प के सिद्ध होने में क्या भूमिका है?
आत्मा जब मानव चोला धारण करता है तो पूर्व जन्म के संस्कारों के साथ इस जन्म में आत्मा में अग्नि, सोम और इंद्र का स्थापित्य यह सुनिष्चित करता है कि व्यक्तिविषेश में कितना आत्म बल है.इस मे ब्रह्मचर्य, और उपासना यज्ञ द्वारा प्रभु कृपा के साथ (वेदों के) स्वाध्याय द्वारा शुभ संकल्प का चयन भी महत्व रखते हैं.
इसी लिए वेद ने उपदेश दिया "कृण्वतोविश्वार्यम". और महर्षि ने वेदाध्यन का आर्यों के लिए महत्व बताया.
जितना वेदों का अध्ययन स्वाध्याय चिंतन हम समाज मे स्थापित करने मे प्रगति करेंगे उतना ही कल्याणमार्ग पर बढेंगे.

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