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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

गो (माता) वेदों में 1.1

(subodh1934@gmail.com)

Y-3-20 Importance of Cow गौ महत्व - Addressing the Cow- गौ को सम्बोधन कर के ः-
अन्ध स्थान्धो वो भक्षीय मह स्थ महो वो भक्षीयोर्ज स्थोर्जं वो भक्षीय रायस्पोष स्थ रायस्पोषं वो भक्षीय ।। यजु-3-20
You are the provider of most desirable objects.- The most desirable first for human beings is our food (First Bible prayer is 'Give us this day our daily bread') that provides sustainable energy for our joys, well being and prosperity and you are the provider of all.
तुम सब प्रार्थना करने योग्य पदार्थों का अक्षय प्राप्ति स्थान हो। (अन्न सबसे प्रथम प्रार्थना करने योग्य पदार्थ है।) यह भक्षणीय पदार्थ हमारे ऊर्जा, सुख, समृद्धि के साधन हैं।

रेवती रमध्वमस्मिन्योनावस्मिन् गोष्ठेSस्मिंल्लोकेSस्मिन् क्षये ।
इहैव स्त मार्पगात।। यजु 3-21
You are the embodiment of entire desirable wealth in this world, on our lands and in our homes. Live here, with our love and peace and never go far from us.
हे गौ तुम वास्तव में विश्व की , इस भूमि की , हमारे निवास स्थान की परम धरोहर हो। तुम हमारे समीप ही स्थापित रहो। हमें छोड़ कर मत जावो।

संहितासि विश्वरूप्यूर्जा माविश गौपत्येन।
उपत्वाग्ने दिवे दिवे दोषावस्तर्ध्दिया वयम्।
नमो भरन्तSएमसि ।। यजुर्वेद 3.22
Cows have the same importance for the world as Vedas. The cows are responsible for the beautiful glow of brilliance and energy of the world. Day by day growing bounties in the world flow from the cows.
We pay homage to such bountiful cows
विश्व के लिए बुद्धि से रूप गुण युक्त सब पदार्थ, अन्नादि के भरण, प्रतिदिन अग्नि ऊर्जा प्रदान करने के साधन उपलब्ध कराती है। गौ का यथार्थ में पृथ्वी पर वेदों जितना ही महत्व है। हम गौ को पूजनीय मानते हैं।