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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

वैदिक उजियारा हो जाए

सत्यार्थ प्रकाश का पढ़ना, यदि जन जन में प्यारा हे जाये |

पथिक

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सत्यार्थ प्रकाश न पढ़नेवाला ज्ञान के क्षेत्र में अन्धा है **

योग दर्शन १-२६

स एष पूर्वेषामपि गुरुः कालेनानवच्छेदात् ||26||

योग दर्शन १-२६

स एष पूर्वेषामपि गुरुः कालेनानवच्छेदात् ||26||

भजन

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pathik bhajan

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