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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

वेदो में विज्ञान व शिल्पविद्या के रहस्य (10)

अथा ते अन्तमानां विद्याम सुमतीनाम् |
मा नो अतिख्य आगहि ||3||

महात्मा नारायण स्वामी जी की 'केन उपनिषद्' पर टीका (आध्यात्मिक भाष्य) चतुर्थःखण्डः से (4)

.....उपर्युक्त 3 वाक्यों में से पहला वाक्य स्पष्ट है | दूसरे वाक्य में, उपनिषद् के पहले वाक्य में जिस ब्रह्मविद्या के कह दिए जाने की बात कही गई है, उसी (ब्रह्मविद्या) के साधन बतलाये गये हैं | वे साधन 3 हैं - (1) तप (2) दम (3) कर्म | इन साधनों को बतला देने का अभिप्राय यह है कि, इन साधनत्रय पर आचरण करने ही से कोई ब्रह्मविद्या को प्राप्त कर सकता है | इनमें से (1) तप* कठोरताओं के सहन करने का नाम है | योगदर्शन में कहा गया है कि तप से अशुद्धियों का क्षय और अशुद्धि-क्षय से देह और इन्द्रियों की सिद्धी होती है |

LOOKING BEYOND KARGIL

AUM
LOOKING BEYOND KARGIL
By Brigadier Chitranjan Sawant,VSM

The Kargil War memorial at Drass is the centre of attraction. 537 names of Martyrs are inscribed there. They were the brave hearts who “gave their today for our tomorrow”. The Indian nation is proud of them. The Kargil Kalash is the centrepiece of the memorial and the temple architecture around lends a spiritually dignified look. The memory of our martyrs is sanctified by floral and emotional tributes of loved ones who come from far and near. Tears well up their eyes, roll down cheeks and mingle with the dust where soldiers lived, fought for and made the supreme sacrifice. They are gone forever but their presence can be felt by their loved ones who find solace and spiritual peace by just gazing at the war memorial and the Kargil Kalash. The living and the dead have an emotional bond of love that is etched in the hearts, never to be erased.

महर्षि पतञ्जलि ऋषि प्रणीत 'योगदर्शनम्' (4)

सरल हिन्दी भाषा में - मूल सूत्र, शब्दार्थ तथा भावार्थ सहित
लेखक - श्री ज्ञानेश्वरार्यः - M.A. दर्शनाचार्य (दर्शन योग महाविद्यालय, आर्यवन, रोजड़, गुजरात के सौजन्य से)

महान सौभाग्य के लिए बल लगा

ओउम् | अग्ने शर्ध महते सौभगाय तव द्युम्नान्युत्तमानि सन्तु |
सं जास्पत्यं सुयममा कृणुष्व शत्रूयतामभितिष्ठा महाँसि ||

FEVER

An article ie reproduced below. It may be helpful.
Devendra Kumar Bakshi
Fever – No Takers ?

Oh, I have fever. Call the Doctor. I must drive it out. I have urgent work at office. I must go. I cannot afford to waste time. What ? Your body’s work is not urgent; your office is.

आइये ऋषि से जानें कुछ प्रश्नों के उत्तर - वेदनित्यत्व‌विषयः (2)

गतांक से आगे -

प्र. - जब सब जगत के परमाणु अलग अलग होके कारणरूप हो जाते हैं तब जो कार्यरूप सब स्थूल जगत् है उसका अभाव हो जाता है, उस समय वेदों के पुस्तकों का भी अभाव हो जाता है, फिर वेदों को नित्य क्यों मानते हो ?

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