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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

आइये ऋषि से जानें कुछ प्रश्नों के उत्तर - वेदनित्यत्व‌विषयः (5/5)

From MAHARSHI DAYANAND SARASWATI's RIGVED-ADI-BHASHYABHUMIKA

प्र. - मनुष्यों की स्वभाव से जो चेष्टा है, उसमें सुख और दुःख का अनुभव भी होता है, उससे उत्तर उत्तर काल में क्रमानुसार से विद्या की वृद्धि भी अवश्य होगी, तब वेदों को भी लोग रच लेंगे, फिर ईश्वर ने वेद रचे, ऐसा क्यों मानना ?

महात्मा स्वामी नारायण जी का संक्षिप्त् जीवन परिचय (3)

(गतांक से आगे)

उस समय देश के स्वतन्त्रता-संग्राम का नेतृत्व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के हाथ में था | बहुत से आर्य नेता कांग्रेस के साथ मिलकर स्वतन्त्रता की लड़ाई में बराबर लडते रहे और बलिदान भी हुए | पर यह भी सत्य है कि आर्य समाज राजनीति से अलग रहा |

AMERICAN GUNBOAT DIPLOMACY IN INDIAN WATERS

AUM

AMERICAN GUNBOAT DIPLOMACY IN INDIAN WATERS
By Brigadier Chitranjan Sawant,VSM

In good old days the United States of America treated the two Americas, north and south, as its area of responsibility. In other words the two continents were like the backyard of the United States. By and large the smaller nations of latin America toed the US line and gave the emerging world power no chance to raise its eyebrow. In North America the other two countries , Canada and Mexico, had no problems as they were never in competition with the US for establishing regional supremacy.

महर्षि दयानन्द कृत आर्याभिविनयः से (38)

स्तुति विषय

गयस्फानो अमीवहा वसुवित्पुष्टिवर्द्धनः |
सुमित्रः सोम नो भव ||38||

INDEPENDENCE DAY AT RED FORT

AUM
INDEPENDENCE DAY AT RED FORT
By Brigadier Chitranjan Sawant,VSM

The Prime Minister reaches the red Fort Delhi at 7.20 AM; he inspects the Inter-Services and Police guard of Honour; he reaches the ramparts and addresses the Nation for 40 minutes or may be more depending on the skies, says Jai Hind with the crowd of school children and goes home.

वेदो में विज्ञान व शिल्पविद्या के रहस्य (12)

यस्य संस्थे न वृण्वते हरी समत्सु शत्रवः |
तस्मा इन्द्राय गायत ||4||

महात्मा नारायण स्वामी जी की 'केन सूक्त' पर टीका - ‍परिशिष्ट (2)

को अस्य बाहू समभरद् वीर्य करवादिति |
अंसौ को अस्य यद् देव कुसिन्धे अध्यादधौ ||5||

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