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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

महात्मा नारायण स्वामी जी की 'केन सूक्त‌' पर टीका - ‍परिशिष्ट‌ (1)

|| ओउम् ||
अथर्ववेदान्तर्गत, केन सूक्त‌
(अथर्व. 10|2)

केन पार्ष्णी आभृते पुरुषस्य केन मांसं संभूतं केन गुल्फौ | केनांगुलीः पेशनीः केन् खानि केनोच्छलंखौ मध्यतः कः प्रतिष्ठाम् ||1||

LAST OF THE LEGIONARY LEGEND - HE PRACTISED JEEVEM SHARADAH SHATAM

AUM
LAST OF THE LEGIONARY LEGEND
By Brigadier Chitranjan Sawant,VSM

5 grand children, 12 great grand children, 14 great great grand children and one great great great grandchild – that is the report card of Henry Allingham, a noted ex-serviceman of the First World War who died at age 113 years in the United Kingdom. A man of many parts, he was much sought after by scribes and lensmen as he always made news but shunned newsmen. A very private person indeed .He did not wish to talk about the war until gradually drawn out of the shell by his ghost biographer, Goodwin. On his demise the Queen of England said that she was saddened. Allingham sacrificed so much for all of us.

महर्षि पतञ्जलि ऋषि प्रणीत 'योगदर्शनम्' (5)

सरल हिन्दी भाषा में - मूल सूत्र, शब्दार्थ तथा भावार्थ सहित
लेखक - श्री ज्ञानेश्वरार्यः - M.A. दर्शनाचार्य (दर्शन योग महाविद्यालय, आर्यवन, रोजड़, गुजरात के सौजन्य से)

पाप का मूल अज्ञान

ओउम् | यच्चिद्धि ते पुरुषत्रा यविष्ठाचित्तिभिश्चकृमा कच्चिदागः |

आइये ऋषि से जानें कुछ प्रश्नों के उत्तर - वेदनित्यत्व‌विषयः (3)

गतांक से आगे -

इसी प्रकार से वेदान्तशास्त्र में वेदों के नित्य होने के विषय में व्यास जी ने भी लिखा है, (शास्त्र..) | इस सूत्र के अर्थ में शंक‌राचार्य ने भी वेदों को नित्य मान के व्याख्यान किया है कि - 'ऋग्वेदादि जो चारों वेद हैं, वे अनेक विद्याओं से युक्त हैं, सूर्य के समान सब सत्य अर्थों के प्रकाश करने वाले हैं | उनका बनाने वाला सर्वज्ञादि गुणों से युक्त परब्रह्म है, क्योंकि सर्वज्ञ ब्रह्म से भिन्न कोई जीव सर्वगुणयुक्त इन वेदों को बना सकें, ऐसा सम्भव कभी नहीं हो सकता | किन्तु वेदार्थविस्तार के लिये किसी जीवविशेष पुरुष से अन्य शास्त्र बनाने का संभव होता है | जैसे पाणिनि आदि मुनियों ने व्याकरणादि शास्त्रों को बनाया है | उनमें विद्या के एक एक देश का प्रकाश किया है | सो भी वेदों के आश्रय से बना सके हैं | और जो सब विद्याओं से युक्त वेद हैं, उनको सिवाय परमेश्वर के दूसरा कोई भी नहीं बना सकता, क्योंकि परमेश्वर से भिन्न सब विद्याओं में पूर्ण कोई भी नहीं है | किञ्च परमेश्वर के बनाये वेदों के पढ़ने, विचारने और उसी के अनुग्रह से मनुष्यों को यथाशक्ति विद्या का बोध होता है, अन्यथा नहीं' ऐसा शंक‌राचार्य ने भी कहा है | इससे क्या आया कि वेदों के नित्य होने में सब आर्य लोगों की साक्षी है | और यह भी कारण है कि जो ईश्वर नित्य और सर्वज्ञ है उसके किये वेद भी नित्य और सर्वज्ञ होने के योग्य हैं | अन्य का बनाया ऐसा ग्रन्थ कभी नहीं हो सकता |

'ईश्वर पूजा का वैदिक स्वरूप'(5) लेखक - शास्त्रार्थ महारथी स्व.पं.रामचन्द्र देहलवी जी

गतांक से आगे -

प्रकृति से हम ले रहे हैं, लेते आए हैं और लेते रहेंगे | क्योंकि वह पूर्ण है | आज की आधुनिक साज-सज्जा की सामग्री रेडियो, ग्रामोफोन, टेलीविजन, रेलगाड़ी, हवाई जहाज आदि सभी प्राकृतिक पदार्थ हैं जो हमने प्रकृति से प्राप्त किए हैं |

PEOPLE'S PRINCESS PASSES AWAY

AUM
PEOPLE’S PRINCESS PASSES AWAY
By Brigadier Chitranjan Sawant, VSM

A PRINCESS IS A PRINCESS and people are people. The twain shall never meet.(kipling , please forgive). There are exceptions and these exceptions prove the rule. Ninety years ago a princess was born in the state of Cooch-Behar and grew up to be a beauty par excellence. Her mother, the Maharani was a princess from the royal family of Baroda and thus the Marathi and the Bengali cultures left a combined imprint on the new born babe. Named Ayesha , she had her education in the school of life travelling from one country to another. It was in one of the Polo seasons of Calcutta where princely India and their British overlords including the Viceroy assembled every winter to play polo that His Highness Maharaja Sawai Man Singh II of Jaipur took a fancy for Ayesha, a teenager. He asked the Maharani of Cooch-Behar for Ayesha’s hand in marriage and in one of her weaker moments the mother-maharani agreed. Ayesha too fell for him and much against the advice of family and friends, their marriage was solemnised in Europe. The Maharajah already had two queens and three children but that was no barrier to the budding love.

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