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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

महर्षि पतञ्जलि ऋषि प्रणीत 'योगदर्शनम्' (6)

सरल हिन्दी भाषा में - मूल सूत्र, शब्दार्थ तथा भावार्थ सहित
लेखक - श्री ज्ञानेश्वरार्यः - M.A. दर्शनाचार्य (दर्शन योग महाविद्यालय, आर्यवन, रोजड़, गुजरात के सौजन्य से)

विद्वान् भगवान का ध्यान करते हैं

ओउम् | यस्तस्तम्भ सहसा वि ज्मो अन्तान् बृहस्पतिस्त्रिषधस्थो रवेण |

आइये ऋषि से जानें कुछ प्रश्नों के उत्तर - वेदनित्यत्व‌विषयः (4)

‍गतांक से आगे -

जैसे शास्त्रों के प्रमाणों से वेद नित्य हैं, वैसे ही युक्ति से भी उनका नित्यपन सिद्ध होता है, क्योंकि 'असत् से सत् का होना अर्थात् अभाव से भाव का होना कभी नहीं हो सकता, तथा सत् का अभाव भी नहीं हो सकता | जो सत्य है उसी से आगे प्रवृति भी हो सकती है, और जो वस्तु ही नहीं है उससे दूसरी वस्तु किसी प्रकार से नहीं हो सकती |' इस न्याय से भी वेदों को नित्य ही मानना ठीक है | क्योंकि जिसका मूल नहीं होता है, उसकी डाली, पत्र, पुष्प और फल आदि भी कभी नहीं हो सकते | जैसे कोई कहे कि वन्ध्या के पुत्र का विवाह मैंने देखा, यह उसकी बात असम्भव है, क्योंकि जो उसके पुत्र होता तो वह वन्ध्या ही क्यों होती, और जब पुत्र ही नहीं है तो उसका विवाह और दर्शन कैसे हो सकते हैं ? वैसे ही जब ईश्वर में अनन्त विद्या है, तभी मनुष्यों को विद्या का उपदेश भी किया है | और जो ईश्वर में अनन्त विद्या न होती तो वह उपदेश कैसे कर सकता, और वह जगत् को भी कैसे रच सकता ? जो मनुष्यों को ईश्वर अपनी विद्या का उपदेश न करता तो किसी मनुष्य को विद्या, जो यथार्थ ज्ञान है सो कभी नहीं होता, क्योंकि इस जगत् में निर्मूल का होना व बढ़ना सर्वथा असम्भव है | इससे यह जानना चाहिये कि परमेश्वर‌ से वेदविद्या मूल को प्राप्त होके मनुष्यों में विद्यारूप वृक्ष विस्तृत हुआ है |

CORRUPTION AND PUNISHMENT IN CHINA

AUM
CORRUPTION AND PUNISHMENT IN CHINA
By Brigadier Chitranjan Sawant,VSM

The People’s Republic of China is an economic giant now. The economy is ever growing. The Chinese consumer goods have flooded markets of the world. Go East or go West, go North or go South, the department stores, the malls and even the street vendors sell Chinese goods. Notwithstanding the anti publicity that the Chinese manufacturers got on account of unacceptable proportion of led in paint on its goods, especially toys, the market all over the world is ever eager to import merchandise from China. Playing, of course, with those toys was detrimental to the health of children. Some goods were even shipped back to China. And yet the international trade of China has flourished. It speaks well of the price structure and marketing technique of Chinese manufacturers. So much so that even the United States of America had an adverse trade balance with China in respect of consumer goods. It did not grow more because China was keen on buying Defence weapon systems and equipment from America to modernise the People’s Liberation Army. Indeed America was too happy to sell but not transfer technology in case of weapon system where her own defence could be adversely affected in future. This is the case with Europe and other developed and developing countries too. India is no exception. India had no military hardware that China needed but has plenty of Information Technology and software thereof on which China has always been keen. Thus China’s international trade has grown by leaps and bounds and hard currency has flown in.

महात्मा स्वामी नारायण जी का संक्षिप्त् जीवन परिचय (2)

(गतांक से आगे)

सन 1926 के 23 दिसम्बर को एक धर्मांध मुसलमान द्वारा स्वामी श्रद्धानन्द जी की हत्या कर दी गई | आर्यजगत् में हाहाकार मच गया | उस समय वे आर्यजगत के सर्वमान्य सर्वोच्च नेता थे | देशभर से आर्यजन देहली में एकत्र हो गए | उस समय महात्मा नारायण स्वामी ने उस शवयात्रा का नेतृत्व किया | उन्हीं के शब्दों में "शव के साथ जो जलूस था, वह असाधारण था | उसमें एक लाख से कम आदमी न होंगे | जलूस को शमशान तक पहुँचाने में सात घण्टे लगे | उत्तम रीति से पुष्कल घृत सामग्री से उनकी अन्त्येष्टि की ग‍ई | अन्त्येष्टि के बाद महात्मा नारायण स्वामी ने उन्हें श्रद्धाञ्जली दी |

महर्षि दयानन्द कृत आर्याभिविनयः से (37)

प्रार्थना विषय

सोम रारन्धि नो ह्रदि गावो न यवसेष्वा | मर्य‌ इव स्व ओक्ये ||37||

दर्शनयोग महाविद्यालय में आगामी क्रियात्मक योग प्रशिक्षण शिविर‌

दर्शनयोग महाविद्यालय से प्राप्त आगामी क्रियात्मक योग प्रशिक्षण शिविर‌ की सूचना आपकी जानकारी हेतु प्रेषित है | कृपया अधिक जानकेरी हेतू निम्न पतों पर सम्पर्क करें |

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