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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

learning sanskrit

Namastey
My understanding of sanskrit is very low and as i believe there are many more persons like me in this forum.Is it possible that any one of our learned member start sanskrit lessons(elementry) but in english on this web site.for this he/she can make the syllabus(very elementry) so that we can understand joining words and then we can use common words to write picture discriptions and on the later stages we can talk in sanskrit.

मूढामूढभेद‌

ओउम |
आ यद्योनि हिरण्ययमाशुर्ऋतस्य सीदति |
जहात्यप्रचेतस: ||
ओउम् |
अभि वेना अनूषतेय क्षन्ति प्रचेतस: |
मज्जन्त्यविचेतस: ||

‌ बन्धुआ मजदूर

क्या आप‌ बन्धुआ मजदूर तो नहीं ?
जी ! क्या कहा ? हा हा हा ! हम और बन्धुआ मजदूर ! क्या बात की आपने | वाह क्या मजाक उड़ाते हैं |हम क्या आपको मजदूर दीखते हैं और वह भी बन्धुआ मजदूर ? भाई ! हम तो अपनी मर्जी के मालिक हैं | अपना कमाते हैं अपना खाते हैं | हमें कोई कुछ थोड़े ही कह सकता है | हाँ मगर आपने यह कैसे समझा कि हम बन्धुआ मजदूर तो नहीं ?

~~~~ निमन्त्रण पत्र ~~~~

आर्य समाज नोयडा

आर्ष गुरुकुल नोयडा एवं वानप्रस्थ आश्रम नोयडा

वार्षिकोत्सव

Maharishi Dayanand

Maharishi Dayanand
Part 1
Poem By Tilak Grover

Maharishi Dyanand writings and his work reveal,
That he was a brave person and a man of steel.
In Indian society he brought about reform after reform,

ज्ञ।न सूर्य का अवतरण‌

ज्ञ।न सूर्य का हुआ अवतरण जब धरती पर
था सृष्टी का आदि काल वह
प्रथम सूर्य की किरणो के संग , मानव जब धरती पर उतरा

वेदकर्त्ता

ओउम् | इन्द्राय साम गायत विप्राय बृहते बृहत | ब्रह्मकृते विपिश्चिते पनस्यवे ||

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