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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

सष्टि के तत्त्व भगवान के आदेश से चलते हैं

ओ३म् |
अहं भूमिमददामार्य्यायाSहं वृष्टिं दाशुषे मर्त्याय |
अहमपो अनयं वावशाना मम देवासो अनु केतमायन् ||
ऋग्वेद 4.26.2

TAMASO MA JYOTIRGAMAYA

AUM

OM

DISPEL INNER DARKNESS ON DIWALI

By Chitranjan Sawant

Rejoice ye all captains and commoners! Lord Ram has returned to Ayodhya after a fourteen-year exile. It is an extra-ordinary homecoming indeed. The ghost of evil personified by Ravana and his tribe is laid to rest for good. Peace prevails all over. Let us light lamps and illuminate home and hearth. The illumination is done well. It is being done year after year. Rejoicing returns on Diwali to lift low morale generated by depression, both mental and mundane; not ignoring the economic one.

Wish you Happy Deepawali

Diwali

Happy Happy joyful Deepawali to all,
Happy Happy festival of lights to all,
The day we must love and adore,

इसे कौन पूछने जाता है

ओ३म् !
को ददर्श प्रथमं जायमानमस्थन्वन्तं यदनस्था विभर्ति |
भूम्या असुरसृगात्मा क्व स्वित्को विद्वांसमुप गात्प्रष्टुमेतत् ||
(ऋग्वेद् 1.164. 4)

नींद कहाँ अब आती मुझको

नींद कहाँ अब आती मुझको
देख रहा जब हर पल तुझको
झाँक रहा था बाहर जब तक
ढूँढ रहा था बाहर तुझको

मथन करने से आत्मज्ञान प्राप्ति

ओ३म् !
त्वामग्ने अङ्गिरसो गुहा हितमन्वविन्दञ्छिश्रियाणं वनेवने |
स जायसे मथ्यमान: सहो महत् त्वामाहु: सहसस्पुत्रमङ्गिर: ||
(ऋग्वेद 5.11.6)

हमारे भवन व यज्ञ शाला कैसी हों ? मेरी परिकल्पना

हमारे भवन व यज्ञ शाला कैसी हों ? मेरी परिकल्पना
विश्वप्रिय आर्य

आर्य समाज की विशेषता कहें या कमजोरी, हम १३० वषँ के गौरवाशाली इतिहास में आज तक कोइँ अपनी पहचान बता सकें - ऐसा भवन नहीं बना पाये और न हीं कोइँ पर्यटन स्थल । यहाँ यह सब लिख कर पाठकों में निराशा का भाव भरने का उद्ेश्य नहीं हैं पर यह एक सत्य हैं ।

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