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कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

मन्त्रानुसार आचरण‌

ओउम
नकिर्देवा मिनीमसि नकिरा योपयामसि मन्त्रश्रुत्यं चरामसि|
पक्षेभिरपिकक्षेभिरत्राभि सं रभामहे ||
ऋग्वेद 10.134.7

कुछ कविताएं

कुछ कविताएं

(1)आदमी का शरीर
आदमी शरीर को मैं मानते हुए, भागता चला जा रहा है
भागता चला जा रहा है

Pandit Lekhram

NAMASTEY,
Few days back while surfing the net I found very interesting details about the work & death of Pandit Lekhram.

भगवान के सख्य का फल‌

ओ३म
शास इत्था महाँ अस्यमित्रखादो अदभुत:|
न यस्य हन्यते सखा न जीयते कदाचन||
ऋग्वेद‌ 10.152.1

कृण्वन्तो विश्वम् आर्यम्

कृण्वन्तो विश्वम् आर्यम्
कविताः तिलक ग्रोवर

हे सकल ऐश्वर्य सम्पन्न परमेश्वर।

वेदवाणी देखिए और दिखाइए

वेदवाणी देखिए और दिखाइए
आर्य समाज का टीवी चैनलों पर प्रसारण वेदवाणी
हर रविवार दोपहर 1.20 बजे आस्था चैनल पर

आत्मोन्नती का सि‍हँद्वार‌

आत्मोन्नती की इच्छा किसको नही है| सभी अपनी सर्वतोन्मुखी उन्नती के लिए कुछ भी करने को सदा उद्दत रहते है शरीर में शक्ति, सुन्दरता, स्वास्थ्य, लचीलापन, गतिशीलता,दिव्यता व दीर्घायू की कामना कौन नहीं करना चाहेगा| इस शरीर का ही मुख्य अंग है बुद्धि ‍, कौन नहीं चाहेगा तीव्र बुद्धि, पैनी बुद्धि,समस्याओं को आनन फानन में सुलझा देने वाली बुद्धि, विलक्षण ग्यान को प्राप्त कर सकने वाली बुद्धि| और कौन नहीं चाहेगा विलक्ष्ण मन , जिसमें कुछ भी कर सकने का साहस हो, जिसके लिए कोई भी कार्य असम्भव न हो| जो वीरता, शौर्य,प्यार,क्षमा, दया, करुणा व आत्म बलिदान की सर्वोच्च भावना से सदा परिपूर्ण हो|

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